खेल को खेल जानकर खेलती हुई कविता , खोलती,टटोलती हर दम खेल खेलती जिंदगी .... हम खेल खेलते हैं .......... खेल को खेल जानकर खेलती हुई कविता , खोलती,टटोलती हर दम खेल खेलती जिंदगी .... हम ख...
समय ने बांधा है तुझे समय पर किसी का ज़ोर नहीं! समय ने बांधा है तुझे समय पर किसी का ज़ोर नहीं!
बहुत याद आती हैं वो यारियां वो बचपन की शैतानियां। बहुत याद आती हैं वो यारियां वो बचपन की शैतानियां।
देखा होगा मेरा बचपन जिसने सजाकर रखी होंगी जिसने वक़्त की मासूमियत भरी दास्ताँ । देखा होगा मेरा बचपन जिसने सजाकर रखी होंगी जिसने वक़्त की मासूमियत भरी दास्ताँ ।
रुलाया जाता है अच्छे और सीधे लोगों को यहां, प्यार की कीमत नहीं यहां, रुलाया जाता है अच्छे और सीधे लोगों को यहां, प्यार की कीमत नहीं यहां,